Bihar Fish Farming Subsidy 2026: मछली पालन पर मिलेगी 60% तक सब्सिडी

🗓️ प्रकाशित: 23 अगस्त 2026  |  ✍️ Nilesh Kumar  |  📂 Sarkari Yojana  |  ⏱️ पढ़ने का समय: 7 मिनट

FY 2026-27अंतिम तिथि: 31 Aug 2026 (बीत चुकी)
ℹ️ अपडेट (19 अक्टूबर 2026): इस योजना में आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 थी और वह बीत चुकी है। आगे आवेदन दोबारा खुलता है या नहीं, इसकी जानकारी fisheries.bihar.gov.in पर देखें।
योजना का नाममत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना (Matsya Prajati Vividhikaran Yojana) 2026-27
विभागपशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार सरकार
लाभइकाई लागत पर 60% तक अनुदान
शामिल प्रजातियांदेसी मछली (माइनर कार्प), कैटफिश/मागुर, झींगा, अन्य मीठे पानी की प्रजातियां
आवेदन मोडऑनलाइन
अंतिम तिथि31 अगस्त 2026
आधिकारिक वेबसाइटfisheries.bihar.gov.in

खेती के साथ अगर आप कम लागत में कोई ऐसा काम शुरू करना चाहते हैं जिससे नियमित आमदनी हो, तो मछली पालन एक बेहतरीन विकल्प बन सकता है। बिहार सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना के तहत आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस योजना के जरिए देसी मछली पालन, झींगा पालन जैसे व्यवसाय शुरू करने वालों को इकाई लागत का 60% तक अनुदान दिया जाएगा। सबसे जरूरी बात — आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 है, यानी अब सिर्फ गिनती के दिन बचे हैं।

🔑 Key Takeaways (मुख्य बातें)

  • देसी मछली, झींगा और कैटफिश पालन पर 60% तक यूनिट कॉस्ट सब्सिडी।
  • आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 — बहुत कम समय बचा है।
  • आवेदन सिर्फ fisheries.bihar.gov.in पर ऑनलाइन होता है।
  • मछली पालक, मछुआरे, SHG, FPO, सहकारी समितियां और उद्यमी — सभी आवेदन कर सकते हैं।
  • उद्देश्य: ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार व स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करना।
  • यूनिट कॉस्ट से ज्यादा खर्च होने पर लाभार्थी को बाकी राशि खुद वहन करनी होती है (सहमति पत्र के साथ)।

योजना क्या है?

मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना, बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की एक पहल है, जिसका मकसद देसी मछली प्रजातियों के संरक्षण और उत्पादन को बढ़ावा देना है। इसके तहत माइनर कार्प, कैटफिश (मागुर), झींगा और अन्य मीठे पानी की प्रजातियों का पालन शुरू करने वाले किसानों व उद्यमियों को इकाई लागत पर सब्सिडी दी जाती है। इसका लक्ष्य सिर्फ मछली उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए साधन पैदा करना भी है। ध्यान रहे — यह बिहार सरकार की राज्य योजना है, जो केंद्र सरकार की व्यापक प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) से अलग है, हालांकि दोनों का उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र को बढ़ावा देना ही है।

पात्रता – कौन आवेदन कर सकता है?

  • बिहार राज्य के स्थायी निवासी।
  • मछली पालन में रुचि रखने वाले किसान, जिनके पास तालाब/जमीन उपलब्ध है (स्वामित्व या लीज पर)।
  • पारंपरिक मछुआरे और मछली विक्रेता।
  • स्वयं सहायता समूह (SHG), किसान उत्पादक संगठन (FPO) और सहकारी समितियां।
  • मत्स्य पालन क्षेत्र में नया व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक उद्यमी।

सब्सिडी राशि व लाभ

घटकविवरण
अनुदान दरइकाई लागत (Unit Cost) का 60% तक
लाभार्थी अंशदानयूनिट कॉस्ट से अधिक खर्च होने पर शेष राशि स्वयं वहन करनी होगी
शामिल गतिविधियांदेसी मछली पालन, झींगा पालन, कैटफिश (मागुर) पालन
भुगतान माध्यमDBT (Direct Benefit Transfer) के जरिए बैंक खाते में

Note: राज्य की इस योजना के अलावा बिहार में तालाब निर्माण/मरम्मत के लिए अलग से “तालाब मत्स्यिकी विशेष सहायता योजना” भी चलती है, जिसकी दरें अलग हैं — दोनों को एक न समझें, आवेदन से पहले संबंधित योजना की जांच जरूर करें।

जरूरी दस्तावेज

  • पासपोर्ट साइज फोटो (स्व-अभिप्रमाणित / self-attested)
  • आधार कार्ड की प्रति
  • भूमि/तालाब से संबंधित दस्तावेज (स्वामित्व या लीज एग्रीमेंट)
  • बैंक पासबुक की प्रति (आधार लिंक)
  • यूनिट कॉस्ट से अधिक खर्च होने की स्थिति में लाभार्थी अंशदान संबंधी सहमति पत्र

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया

  1. fisheries.bihar.gov.in की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
  2. “मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना” या संबंधित योजना का ऑनलाइन आवेदन लिंक खोजें।
  3. अपना नाम, पता, आधार नंबर और तालाब/भूमि की जानकारी भरें।
  4. ऊपर बताए गए सभी दस्तावेज स्कैन करके अपलोड करें।
  5. यूनिट कॉस्ट और चुनी गई गतिविधि (देसी मछली/झींगा/कैटफिश) के अनुसार विवरण भरें।
  6. फॉर्म को ध्यान से जांचकर 31 अगस्त 2026 से पहले फाइनल सबमिट करें।
  7. सबमिट के बाद विभाग द्वारा सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने पर अनुदान राशि DBT से खाते में आएगी।

मछली पालन क्यों फायदेमंद है?

पारंपरिक खेती के साथ मछली पालन एक ऐसा विकल्प है जिसमें अपेक्षाकृत कम निवेश में नियमित आमदनी शुरू हो सकती है। देसी प्रजातियों को बढ़ावा देने से बाजार में मांग वाली मछलियों (मागुर, झींगा) की उपलब्धता बढ़ती है, जिससे बेहतर बाजार भाव मिलने की संभावना रहती है। इसके अलावा यह ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और युवाओं के लिए स्वरोजगार का भी एक अच्छा जरिया बनता जा रहा है, खासकर उन इलाकों में जहां तालाब और जल-स्रोत आसानी से उपलब्ध हैं।

FAQs — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बिहार मछली पालन योजना 2026 में कितनी सब्सिडी मिलती है?

मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना के तहत इकाई लागत पर 60% तक सब्सिडी मिलती है।

आवेदन की अंतिम तिथि क्या है?

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 है।

आवेदन कहां करें?

fisheries.bihar.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

कौन सी मछली प्रजातियां शामिल हैं?

देसी मछली (माइनर कार्प), कैटफिश (मागुर), झींगा और अन्य मीठे पानी की प्रजातियां शामिल हैं।

कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?

पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, भूमि/तालाब दस्तावेज और जरूरत पड़ने पर अंशदान सहमति पत्र चाहिए।

क्या यह योजना सिर्फ मछली पालकों के लिए है?

नहीं, मछुआरे, विक्रेता, SHG, FPO, सहकारी समितियां और उद्यमी भी आवेदन कर सकते हैं।

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⚠️ Disclaimer: rupayasalah कोई Official Government Website नहीं है। यह एक Independent Information Portal है। यह जानकारी 23 अगस्त 2026 तक उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। आवेदन से पहले कृपया fisheries.bihar.gov.in पर अंतिम तिथि व नियम जरूर वेरीफाई करें, क्योंकि सरकारी योजनाओं की तारीखें आगे बढ़ाई या बदली जा सकती हैं।

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